जल संरक्षण में पंचायतों की अग्रणी भूमिका, सोनहत विकासखंड बना मिसाल..

बोडार/सोनहत। भूमिगत जल स्तर बढ़ाने एवं निस्तरीय जल के समुचित उपयोग को लेकर देशभर में जल शक्ति मंत्रालय द्वारा विभिन्न जनजागरूकता कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। केंद्र व राज्य सरकारों के नीतिगत निर्णयों के साथ-साथ स्थानीय प्रशासन भी जल संरक्षण को जनआंदोलन का रूप देने में जुटा हुआ है।
इसी क्रम में कोरिया जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में सोनहत विकासखंड द्वारा जल संचयन की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की सराहना राष्ट्रीय स्तर पर भी की गई है। जिला प्रशासन के निर्देशानुसार जनपद पंचायत सोनहत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी के नेतृत्व में क्षेत्र की सभी ग्राम पंचायतें पूरी निष्ठा के साथ जल संरक्षण कार्यों में सक्रिय हैं।
विकासखंड सोनहत अंतर्गत ग्राम पंचायत बुढ़ार में नदी-नालों के जल को यथास्थान रोककर जल भराव की व्यवस्था की जा रही है। साथ ही गांव में स्वच्छता के तहत सोकपिट (शोक पीठ) गड्ढों का निर्माण कर निस्तारी जल के समुचित निपटान की दिशा में कार्य किया जा रहा है। पंचायत के सचिव प्रवीण कुमार पांडे, सरपंच संगीता सिंह मार्को एवं उपसरपंच सुरेश कुमार राजवाड़े ने बताया कि पंचायत के जनप्रतिनिधियों, मेट तथा वरिष्ठ नागरिकों की संयुक्त बैठक आयोजित कर गांव में जल संचयन को प्राथमिकता देने का सर्वसम्मत निर्णय लिया गया।
क्षेत्रीय नदियों और नालों पर अस्थायी अवरोध बनाकर जल को रोका गया है, जिससे बेहतर जल भराव देखने को मिल रहा है। किसानों के खेतों में सीढ़ीनुमा गड्ढों का निर्माण तेजी से किया जा रहा है, जिससे वर्षा जल का अधिकतम संचयन सुनिश्चित हो सके। इसके अतिरिक्त प्रधानमंत्री आवास एवं कच्चे मकानों में नहानी घरों के समीप सोकपिट निर्माण कर निस्तारी जल के प्रबंधन की व्यवस्था की जा रही है।
इन कार्यों की सतत मॉनिटरिंग कलेक्टर चंदन त्रिपाठी, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत डॉ आशुतोष चतुर्वेदी तथा सीईओ सोनहत मनोज सिंह जगत द्वारा की जा रही है। पंचायतें इस अभियान में मुख्य भूमिका निभाते हुए आमजन को भी सहभागी बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
पंचायत प्रतिनिधियों ने नागरिकों से अपील की है कि जल संरक्षण एवं संवर्धन के इस अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित बनाने में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करें।




