तालाब है कि डबरी जो भी है जल संरक्षण में जीरो योजनाओं का धरातल में बुरा हाल….

कमाल की टेक्निक पूरा बरसात निकल गया और ये प्यासा ही है लाखो खर्च कर जल संरक्षण भूल जल बढ़ाने की दिशा वाली योजना धरातल में लापरवाहियों की भेंट चढ़ती जा रही है। मामला सोनहत जनपद पंचायत के ग्राम पंचायत बंशीपुर का जहाँ तालाब या डबरी निर्माण के लिए सही स्थल चुनाव में ही तकनीक फैल नजर आ रही है। अनुमानित लाखो रु के निर्माण कार्य वन भूमि में पंचायत स्तर से कर दिए जा रहे सिर्फ शासन के रुपयों को खपाया और पाया जा रहा मानो पूरा बरसात गुजरने वाला है ऐसे में स्टीमेट छमता से कोषों दूर जल संरक्षण के लिए पानी जुट पाया है। जो घोर लापरवाही को उजागर करता है। जहाँ जिले के कलेक्टर जल संरक्षण के लिए अनेकों उपाय कर रही मैदानी स्थल में जल संरक्षण निर्माण में हांथ बटा रही तो दूसरी ओर उनके सम्बंधित कोडिया पन से ग्रसित है। लाखो खर्च लेकिन तालाब खाली गजब की निंजा टेक्निक शासन के रुपए हैंग करने की और तो और तालाब निर्माण में जंगली अमानक पत्थरो का उपयोग पिचिंग कार्य के लिए कर दिया जाता है जिसका ट्रांसपोर्टिंग के नाम पर लंबा चौड़ा बिलिंग कर रुपए हड़प ली जाती है। जबकि मजदूरो से ही आस पास के पत्थरों को उठवा कर रखवा दिया जाता है। इंजीनियर साहब खाना खा कर आते है और आंख बंद कर कार्य का मूल्यांकन कर देते है। जिसके बाद योजना कागजो में फलने फूलने लगता है। धरातल में पानी ही नही रहता योजना लापरवाही की भेंट चढ़ जाती है। मनरेगा कार्यो में भारी अनियमितता बरती जा रही लेकिन कड़ी कार्यवाही कोषों दूर है मन की मंगणित बन गई है मनरेगा लाभ किसे पहुँचाया जाता है ये तो सम्बंधित निर्माण कार्यो के कागज ही बता सकते है। बरहाल मनरेगा की दशा और दिशा जिले में ठीक ठाक नजर नही आती देखना होगा कि अधिकारियों का क्या रुख होता है।




