प्रथम अपीलीय अधिकारी के आदेश की कमर तोड़ते जन सूचना अधिकारी, कार्यप्रणाली पर उठे सवाल?…

सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए बनाए गए नियमों की धज्जियां उड़ती नजर आ रही हैं। जनपद पंचायत सोनहत अंतर्गत एक मामले में प्रथम अपीलीय अधिकारी द्वारा स्पष्ट आदेश दिए जाने के बावजूद 10 दिन की समय-सीमा बीत जाने पर भी आवेदक को जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है।
मामले में प्रथम अपील प्रकरण क्रमांक 06/2026 में आदेश जारी करते हुए प्रथम अपीलीय अधिकारी, जिला पंचायत कोरिया ने जन सूचना अधिकारी को निर्देशित किया था कि आवेदक को 10 दिवस के भीतर संपूर्ण जानकारी उपलब्ध कराई जाए। लेकिन आज दिनांक 27 तक न तो कोई सूचना दी गई और न ही किसी प्रकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई।
सूत्रों के अनुसार, संबंधित जन सूचना अधिकारी द्वारा आदेश की अनदेखी करते हुए सूचना देने में जानबूझकर लापरवाही बरती जा रही है, जो कि सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 7(1) एवं 7(6) का सीधा उल्लंघन माना जा रहा है। इस प्रकार की कार्यशैली से न केवल शासन की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं, बल्कि आम नागरिकों के अधिकारों का भी हनन हो रहा है।

मामला सोनहत जनपद पंचायत के ग्राम पंचायत मधौरा से जुड़ा हुआ है। जन सूचना अधिकारी जनपद पंचायत सोनहत कार्यालय से सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत 15वे वित्त राशि खर्च सम्बंधित दस्तावेज चाही गई थी। जिस पर कार्यवाही करते हुए हुए जनसूचना अधिकारी ने आधी अधूरी जानकारी आवेदक को उपलब्ध करवाई अपील प्रकरण में 10 दिवस के भीतर अपील अधिकारी ने पूर्ण जानकारी देने जन सूचना अधिकारी को आदेशित किया । दस दिवस से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी अपीलार्थी के हांथ खाली है। आखिर क्या कमी है जो जानकारी देने से जन सूचना अधिकारी कतरा रहे है। क्या छुपाना चाहते है। सबसे बड़ा सवाल?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निर्धारित समय सीमा में सूचना उपलब्ध नहीं कराई जाती है, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान है, जिसमें आर्थिक दंड भी शामिल हो सकता है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि उच्च अधिकारी इस गंभीर लापरवाही पर क्या कार्रवाई करते हैं और क्या जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ कोई ठोस कदम उठाया जाता है या नहीं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button