तुगलकी फरमान निरस्त, जनपद पंचायत सोनहत ने लिया बड़ा फैसला, जिला पंचायत सदस्य व कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष की पहल लाई रंग

कोरिया जिले में पंचायत व्यवस्था से जुड़ा एक तुगलकी और विवादित आदेश आखिरकार जनपद पंचायत सोनहत द्वारा निरस्त कर दिया गया है। यह महत्वपूर्ण फैसला जिला पंचायत सदस्य और कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष की लगातार पहल और हस्तक्षेप के बाद संभव हो पाया।

पूर्व में जारी आदेश से ग्राम पंचायतों में निर्माण कार्यों के निरीक्षण, निगरानी समिति और भुगतान प्रक्रिया को लेकर भारी भ्रम की स्थिति बन गई थी। पंचायत प्रतिनिधियों का कहना था कि यह आदेश न तो व्यवहारिक था और न ही जनहित में।
मामले को लेकर जिला पंचायत सदस्य और कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष ने जनपद पंचायत के समक्ष आपत्ति दर्ज कराई और आदेश को तुगलकी बताते हुए उसे वापस लेने की मांग की। जनदबाव और आपत्तियों को गंभीरता से लेते हुए जनपद पंचायत ने पूर्व आदेश को निरस्त कर नया स्पष्ट आदेश जारी किया।
जनपद पंचायत के इस फैसले से पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों में राहत की लहर है। वहीं कांग्रेस नेताओं ने इसे जनहित की जीत बताते हुए कहा कि आगे भी पंचायतों के अधिकार और पारदर्शिता के लिए संघर्ष जारी रहेगा।
क्या थी खबर वो भी जान लीजिए
कोरिया जिले के जनपद पंचायत सोनहत द्वारा ग्राम पंचायतों में कराए जा रहे निर्माण कार्यों के निरीक्षण के लिए गठित निर्माण कार्य निगरानी समिति को लेकर अब विवाद गहराता जा रहा है। जिला पंचायत सदस्य सुरेश सिंह ने इस आदेश का खुला विरोध करते हुए इसे पंचायती राज व्यवस्था के अधिकारों के विपरीत बताया है।

कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष व जिला पंचायत सदस्य सुरेश सिंह ने कहा कि जनपद पंचायत द्वारा गठित यह समिति ग्राम पंचायतों की स्वायत्तता पर सीधा हस्तक्षेप है। पंचायत अधिनियम के अनुसार ग्राम पंचायतों में कराए जा रहे निर्माण कार्यों की निगरानी का प्रथम अधिकार ग्राम सभा, सरपंच एवं पंचायत सचिव का होता है। ऐसे में जनपद स्तर की समिति को सीधे निरीक्षण, मूल्यांकन अथवा भुगतान प्रक्रिया से जोड़ना नियमों की भावना के विपरीत है।
भोले-भाले सरपंचों पर दबाव की आशंका
सुरेश सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि अधिकांश ग्राम पंचायतों के सरपंच ग्रामीण पृष्ठभूमि से हैं और तकनीकी व प्रशासनिक जानकारी के अभाव में दबाव में आ सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की समितियां आगे चलकर सरपंचों पर अनावश्यक दबाव, हस्तक्षेप और भय का कारण बन सकती हैं।
कानूनी रूप से कहां सही, कहां गलत
जानकारों के अनुसार जनपद पंचायत को निर्माण कार्यों की समीक्षा व मॉनिटरिंग का अधिकार अवश्य है, लेकिन
ग्राम पंचायत के कार्यों में सीधा नियंत्रण,
मूल्यांकन के आधार पर भुगतान रोकने या अनुमति देने,
और सरपंच-सचिव की भूमिका को गौण करने
जैसे कदम पंचायती राज अधिनियम की मूल भावना से मेल नहीं खाते।
आदेश में समिति की शक्तियां स्पष्ट न होना भी विवाद का बड़ा कारण बन रहा है।
उच्च अधिकारियों से शिकायत
जिला पंचायत सदस्य सुरेश सिंह ने बताया कि उन्होंने इस पूरे मामले को लेकर कलेक्टर एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत कोरिया के संज्ञान में लाने की तैयारी कर ली है और मांग करेंगे कि
इस आदेश को तत्काल निरस्त किया जाए, ताकि ग्राम पंचायतों की स्वतंत्रता और सरपंचों का अधिकार सुरक्षित रह सके।




