वर्तमान AC के कार्यकाल में छात्रावासों में 4 बड़ी घटनाएँ, क्या विभागीय दायित्व सम्हालने में फेल है?

1. कटगोड़ी पोस्ट मैट्रिक छात्रावास में 11वीं के छात्र ने फांसी लगाकर आत्महत्या की।
2. कन्या छात्रावास में नाबालिग छात्रा ने बच्चे को जन्म दिया।
3. छात्रावास में सिक्योरिटी मनी के नाम पर कथित वसूली के विरोध में छात्रों का चक्का जाम।
4. छात्रावास के प्यून पर छेड़छाड़ का आरोप, हालांकि कोर्ट ने बाद में कर्मचारी को निर्दोष मानते हुए बहाल किया
कोरिया जिला में आदिवासी विकास विभाग के छात्रावासों में बीते समय के दौरान सामने आई कई गंभीर घटनाओं ने विभागीय प्रबंधन और निगरानी व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है। जिले में आदिवासी छात्र-छात्राओं के लिए संचालित छात्रावासों की जिम्मेदारी विभागीय स्तर पर सहायक आयुक्त (AC) के पास होती है। ऐसे में लगातार सामने आई घटनाओं के बाद अब उनकी कार्यप्रणाली और निरीक्षण व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
हाल ही में कटगोड़ी स्थित पोस्ट मैट्रिक छात्रावास में 11वीं कक्षा के एक छात्र द्वारा फांसी लगाकर आत्महत्या करने की घटना सामने आई। बताया जा रहा है कि घटना से कुछ समय पहले छात्र ने अपने पिता से फोन पर बात की थी और घर जाने की बात कही थी। इसके बाद छात्र ने छात्रावास के कमरे में पंखे से फांसी लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर मर्ग कायम किया और मामले की जांच शुरू कर दी।
इससे पहले जिले के एक कन्या छात्रावास में रहने वाली नाबालिग छात्रा के गर्भवती होने और छात्रावास में ही बच्चे को जन्म देने का मामला भी सामने आया था। इस घटना ने छात्रावासों में सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। मामले के सामने आने के बाद पुलिस द्वारा प्रकरण दर्ज कर जांच की गई थी।
इसी बीच छात्रावास प्रबंधन से जुड़ा एक और विवाद उस समय सामने आया जब छात्रो ने कथित अवैध वसूली के विरोध में सड़क पर उतरकर चक्का जाम कर दिया था। आरोप था कि सिक्योरिटी मनी के नाम पर छात्रों से राशि की मांग की जा रही है। प्रदर्शन के दौरान कुछ समय के लिए यातायात भी प्रभावित हुआ और प्रशासन को हस्तक्षेप कर स्थिति को संभालना पड़ा।
वहीं एक अन्य मामले में छात्रावास के एक प्यून पर बालक से छेड़छाड़ का आरोप लगाया गया था। मामला न्यायालय तक पहुंचा, जहां सुनवाई के बाद आरोपी कर्मचारी को निर्दोष माना गया और बाद में उसे पुनः सेवा में बहाल कर दिया गया।
लगातार सामने आई इन घटनाओं के बाद अब जिले में आदिवासी छात्रावासों की सुरक्षा, निगरानी और प्रबंधन व्यवस्था को लेकर बहस तेज हो गई है। अभिभावकों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि दूरदराज क्षेत्रों से आने वाले छात्र-छात्राएं इन छात्रावासों में रहते हैं, ऐसे में उनकी सुरक्षा और देखरेख सुनिश्चित करना विभाग की बड़ी जिम्मेदारी है।
जिले में इन घटनाओं के सामने आने के बाद अब लोगों की नजर प्रशासन और आदिवासी विकास विभाग की आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई है।




