सोनहत विकासखंड के बीहड़ वनांचल क्षेत्रो में ताले के भरोसे स्वास्थ्य सेवाए..

कोरिया सोनहत विकासखंड के बीहड़ वनांचल क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था भगवान भरोसे चल रही है। सरकार भले ही लाखो रुपए खर्च कर ग्रामीण अंचलों में स्वास्थ्य सुविधाएं मजबूत करने के दावे कर रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है।

प्राथमिक उपचार की आस लेकर अस्पताल पहुंच रहे मरीजों को बंद दरवाज़े और लटके हुए ताले ही नसीब हो रहे हैं। ऐसी स्थिति में ग्रामीणों को इलाज के लिए लंबी दूरी तय कर मुख्यालय या अन्य क्षेत्रों की ओर जाना पड़ता है। यह न केवल आर्थिक रूप से उन्हें परेशान कर रहा, बल्कि समय पर इलाज न मिलने से बीमारी भी गंभीर हो सकती है।

80 किलोमीटर दूर आनंदपुर में लटकता ताला

सोनहत खंड मुख्यालय से लगभग 80 किलोमीटर दूर स्थित आनंदपुर स्वास्थ्य केंद्र में निरीक्षण के दौरान ताला लटकता मिला। वहीं ग्राम बेलार्ड में भी यही स्थिति देखने को मिली, जहाँ स्वास्थ्य केंद्र बंद पाया गया।

लाखों की इमारतें, लेकिन व्यवस्था फेल

सरकार ने लाखों रुपये खर्च कर स्वास्थ्य भवन बनवाए, लेकिन जब स्टाफ ही मौजूद न हो, तो ये इमारतें सिर्फ शोपीस बनकर रह गई हैं।

जिम्मेदार मुख्यालय से दूर

सूत्रों के अनुसार स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारी खुद मुख्यालय से दूर निवास करते हैं। वे अधिकतर समय आवागमन में या कार्यालय में ही बिताते हैं, जिससे क्षेत्रीय निगरानी शून्य जैसी है।

मौसमी बीमारियाँ पैर पसार रहीं, खतरे की घंटी

बरसात के मौसम है ऐसे में कई रोग तेजी से फैलती हैं। ऐसे समय में यदि बीहड़ इलाकों में प्राथमिक चिकित्सा भी सुलभ न हो, तो हालात और खराब होने की संभावनाएं बढ़ जाती है।

? सवाल यह है कि स्वास्थ्य महकमा कब जागेगा?

क्या अब भी उच्चाधिकारियों को इन लटके ताले वाली तस्वीरों से सबक नहीं मिलेगा?

जरूरत है तत्काल निरीक्षण कर लापरवाह कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाए और बीहड़ क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाएं सशक्त की जाएं।

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