कोरिया वन मंडल में एक अधिकारी की नींव मजबूत निर्माण कार्य उतान..

कोरिया वन मंडल के बैकुंठपुर वन परिक्षेत्र अंतर्गत केतकी झरिया से लगे गेल्हानाला में लगभग पाँच वर्ष पूर्व बना स्टॉप डेम अब पूरी तरह क्षतिग्रस्त होकर बह गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यह निर्माण कार्य तत्कालीन रेंजर और वर्तमान में एसडीओ की देखरेख में कराया गया था।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य में भारी अनियमितता और गुणवत्ताहीन सामग्री का उपयोग किया गया। उनका कहना है कि डेम में सरिया तक नहीं डाली गई, जिससे पानी का तेज बहाव यह संरचना सहन नहीं कर सकी और पाँच साल में ही ढह गई। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि गुणवत्तापूर्ण निर्माण होता तो यह डेम कम से कम 15 से 25 साल तक टिक सकता था।
स्थानीय लोग बताते हैं कि यह क्षेत्र हाथियों का प्रिय विचरण स्थल है। यहाँ जल संरक्षण की योजना से न केवल हाथियों को पानी मिलना था बल्कि भूजल स्तर और सिंचाई में भी वृद्धि की उम्मीद थी। लेकिन विभागीय लापरवाही के कारण योजना पूरी तरह विफल हो गई।
ग्रामीणों का आरोप है कि बंदरबांट और भ्रष्टाचार के कारण गुणवत्ताहीन निर्माण हुआ। अब स्थिति यह है कि सरकार की मंशा तो जल संरक्षण और वन्यजीव संरक्षण की थी, मगर जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही से योजना का लाभ न तो वन्य प्राणियों को मिल पाया और न ही ग्रामीणों को।
गौरतलब है कि जिस अधिकारी की देखरेख में यह डेम बना था, उन्हें समय-समय पर प्रमोशन पर प्रमोशन मिलते रहे हैं। अब वे रिटायरमेंट की कगार पर हैं। इससे पहले भी इन्हीं की देखरेख में बना डब्लूबीएम सड़क विवादों में रहा और उसकी गुणवत्ता को लेकर विभाग ने जांच टीम गठित की थी।
अब सवाल यह है कि इस बहे हुए स्टॉप डेम के मामले में विभाग क्या कार्रवाई करेगा और दोषियों पर कोई ठोस कदम उठाएगा या नहीं? ग्रामीणों में इसको लेकर गहरा आक्रोश है और वे उच्चस्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं।




