स्कूली बच्चों के हक पर डाका रनिंग वाटर सप्लाई व हैंडवॉश स्टेज निर्माण में भारी अनियमितता, 15वें वित्त की राशि का खुला दुरुपयोग

सोनहत विकासखण्ड के ग्राम पंचायत तंजरा में स्कूली बच्चों और आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए स्वच्छता सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किए गए रनिंग वाटर सप्लाई एवं हैंडवॉश स्टेज निर्माण कार्य में गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि निर्माण एजेंसी और जिम्मेदारों ने घटिया सामग्री का इस्तेमाल कर शासकीय धन का खुला दुरुपयोग किया, जिससे बच्चों के हक पर सीधा डाका डाला गया है।
बताया जा रहा है कि यह पूरा कार्य 15वें वित्त आयोग की राशि से कराया गया था, ताकि स्कूलों और आंगनबाड़ियों में बच्चों को साफ-सफाई की बेहतर सुविधा मिल सके। लेकिन निर्माण कार्य की गुणवत्ता इतनी खराब रही कि महज एक साल के भीतर ही हैंडवॉश स्टेज टूट-फूट का शिकार हो गए। कई स्थानों पर टाइल्स उखड़ चुकी हैं, तो कहीं नल-टोंटी ही नहीं लगाई गई। कुछ आंगनबाड़ी केंद्रों में तो बिना टाइल्स और बिना नल के ही हैंडवॉश स्टेज बना कर खानापूर्ति कर दी गई, जिसे ग्रामीण “लॉलीपॉप की तरह दिखावटी सुविधा” बता रहे हैं।
स्थानीय लोगों और अभिभावकों का कहना है कि कागजों में लाखों रुपये खर्च दिखाए गए, लेकिन जमीनी हकीकत इसके ठीक उलट है। आरोप है कि जिम्मेदारों ने गुणवत्ता की अनदेखी कर सरकारी राशि की जमकर बंदरबांट की और मलाई खाई, जबकि नुकसान सीधे तौर पर मासूम स्कूली बच्चों को उठाना पड़ रहा है। जिन सुविधाओं से बच्चों में स्वच्छता की आदत विकसित होनी थी, वही सुविधाएं अब अनुपयोगी और खतरनाक साबित हो रही हैं।
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि यदि निर्माण कार्य में तय मानकों के अनुसार सामग्री का उपयोग किया गया होता और समय-समय पर निरीक्षण हुआ होता, तो आज यह स्थिति नहीं बनती। आंगनबाड़ी और स्कूलों में पढ़ने वाले छोटे बच्चों की सेहत और स्वच्छता से इस तरह का खिलवाड़ बेहद गंभीर विषय है।
मामले को लेकर क्षेत्र में आक्रोश का माहौल है। ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और अभिभावकों ने पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराने, दोषी निर्माण एजेंसी व अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने तथा दोबारा गुणवत्तापूर्ण निर्माण कर बच्चों को वास्तविक सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की है।
अब सवाल यह उठता है कि क्या जिम्मेदार विभाग इस मामले में सख्त कदम उठाएंगे या फिर 15वें वित्त की राशि से किए गए इस कथित दुरुपयोग पर भी लीपापोती कर दी जाएगी। फिलहाल स्कूली बच्चों और आंगनबाड़ी के मासूमों की स्वच्छता सुविधा बदहाल है और जवाबदेही तय होना बाकी है।

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