विरासत बचाने की मिसाल: युवाओं के श्रमदान से ‘अंधारी ढोढ़ी’ का बदला स्वरूप, स्वच्छता अभियान बना प्रेऱणा..

कोरिया के सोनहत जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत सलगावां कला में आज स्वच्छता, जनभागीदारी और विरासत संरक्षण का एक प्रेरणादायक उदाहरण देखने को मिला। गांव के प्राचीन और ऐतिहासिक महत्व वाले पुरातात्विक स्थल ‘अंधारी ढोढ़ी’ की विशेष साफ-सफाई कर उसे नया जीवन देने का सराहनीय कार्य किया गया। लंबे समय से उपेक्षित इस धरोहर की हालत काफी दयनीय हो चुकी थी, लेकिन ग्रामीणों और युवाओं की एकजुट पहल ने इसकी तस्वीर बदल दी।
बताया जाता है कि ‘अंधारी ढोढ़ी’ गांव की पहचान से जुड़ा एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थल है, जो वर्षों से देखरेख के अभाव में गंदगी और मलबे से भर चुका था। ढोढ़ी के आसपास झाड़ियां उग आई थीं, कचरे का ढेर लग गया था और भीतर गंदा पानी व मलबा जमा हो गया था, जिससे इसकी मूल संरचना भी प्रभावित हो रही थी। इस स्थिति को देखते हुए ग्राम पंचायत ने इसे स्वच्छ और संरक्षित करने का संकल्प लिया।
उपसरपंच आशीष जायसवाल के नेतृत्व में आज सुबह से ही ग्रामीणों और युवाओं की टीम ने श्रमदान शुरू किया। अभियान के दौरान युवाओं ने पहले ढोढ़ी के आसपास फैली झाड़ियों को काटा, कचरे को हटाया और पूरे परिसर को साफ किया। इसके बाद ढोढ़ी के अंदर जमा पानी और मलबे को बाहर निकालकर उसकी गहराई से सफाई की गई। कई घंटों तक चले इस अभियान के बाद ‘अंधारी ढोढ़ी’ का स्वरूप पूरी तरह बदल गया और वह फिर से अपने मूल रूप में नजर आने लगी।
इस अभियान की खास बात यह रही कि इसमें गांव के युवाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और सामूहिक जिम्मेदारी का परिचय दिया। स्वच्छता के इस कार्य में उपसरपंच आशीष जायसवाल, पंच केपी सिंह, पंच प्रतिनिधि मिथिलेश राजवाड़े सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण और युवा उपस्थित रहे। श्रमदान करने वालों में प्रियांशु, अमर साय, अनीश, छोटे, कुलदीप शर्मा, अनमोल, हरवेन्द्र, आदित्य, राजेंद्र, राजेश, अशोक, अर्जुन, विनय और प्रकाश सहित अन्य युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
उपसरपंच आशीष जायसवाल ने कहा कि “अंधारी ढोढ़ी केवल एक जलस्रोत नहीं बल्कि हमारे गांव की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान है। इसे स्वच्छ रखना और सुरक्षित करना हम सभी की जिम्मेदारी है। अगर हम अपनी विरासत को नहीं बचाएंगे, तो आने वाली पीढ़ियां इससे वंचित रह जाएंगी।” उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में भी इस तरह के स्वच्छता और संरक्षण अभियान लगातार चलाए जाएंगे।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इस प्राचीन स्थल के संरक्षण और सौंदर्यीकरण के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। यहां आवश्यक सुविधाएं विकसित की जाएं, ताकि यह स्थल न केवल सुरक्षित रहे बल्कि पर्यटन की दृष्टि से भी विकसित हो सके।
इस पहल ने यह साबित कर दिया है कि यदि समाज के लोग एकजुट होकर प्रयास करें, तो किसी भी उपेक्षित स्थल को फिर से जीवंत बनाया जा सकता है। सलगावां कला के युवाओं का यह प्रयास अन्य गांवों के लिए भी एक मिसाल बनकर उभरा है।
स्वच्छता के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक विरासत को बचाने की यह मुहिम समाज में जागरूकता और जिम्मेदारी का संदेश देती है—कि बदलाव की शुरुआत हमेशा हमसे ही होती है।




