पीएम आवास गरीब के सिर पर पक्के छत का सपना पूरा होने ही वाला था कि वन विभाग ने कर दिया चकना चूर..

प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत गरीबों को पक्के मकान का सपना है। लेकिन यह सपना पूरा होने से पहले ही टूट गया। कोरिया वन मंडल के देवगढ़ परिक्षेत्र अंतर्गत ओदारी बिट में वन विभाग द्वारा चलाए गए अतिक्रमण हटाओ अभियान में करीब 15 जेसीबी मशीनों की मदद से वन भूमि को खाली कराया गया। इस दौरान कई मकान जमींदोज कर दिए गए जिसमें प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने अनुमानित 3 मकान भी शामिल हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि केंद्र और राज्य सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक पीएम आवास योजना है। हितग्राही जेठू सिंह, जो ग्राम पंचायत ओदारी के रहने वाले हैं। का मकान भी ढहा दिया गया। उनका पक्का मकान आधा बन चुका था । उन्हें लग रहा था कि जल्द ही कच्चे घर की जिंदगी खत्म होगी और परिवार पक्के आशियाने में रहेगा। लेकिन वन विभाग के बुल्डोजर ने उनके इस सपने को चकनाचूर कर दिया।
सूत्रों के अनुसार, तीनों मकान लगभग टॉप लेवल तक तैयार थे। अब हितग्राही मानसिक तनाव और आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। सवाल यह भी उठता है कि..

अगर गलती हितग्राही की थी तो वन विभाग के कर्मचारी मकान निर्माण के शुरुआती दौर में कहां थे?
जिओ टैगिंग के दौरान पीएम आवास निर्माण संबंधितों ने वन भूमि पर निर्माण को नजरअंदाज कैसे कर दिया?
गौरतलब है कि कोई भी मकान एक दिन में नहीं बनता। महीनों की मेहनत, सामग्री, मजदूरी और किस्तों का पैसा लगता है। ऐसे में अब हितग्राहियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती इस नुकसान की भरपाई कैसे होगी और कौन करेगा । वे दर-दर भटक कर अपनी पीड़ा व्यथा सुना रहे है।
सरकार गरीबों को पक्का घर देने का दावा कर रही है, पर जमीनी हकीकत ओदारी की यह बया कर रही कि एक विभाग का काम दूसरे विभाग की योजना को रौंद रहा है। आखिर गरीब अब करे तो करे क्या?




