सोनहत पार्क जंगलों में सैलानियों का प्रवेश शुरू, प्रकृति और वन्यजीवों की अद्भुत दुनिया का कर सकेंगे दीदार..

बरसात के बाद आज से खुला गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान – तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व
सोनहत/कोरिया
प्रकृति प्रेमियों और सैलानियों के लिए खुशखबरी है। तीन महीने तक बंद रहने के बाद आज 1 अक्टूबर से गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान और तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व को पर्यटकों के लिए खोल दिया गया है। बरसात के मौसम में सुरक्षा कारणों से हर साल की तरह इस बार भी जुलाई से सितंबर तक पर्यटकों का प्रवेश वर्जित रहा। अब जब मानसून विदा हो चुका है, तो हरे-भरे जंगलों, कल-कल करते झरनों और दुर्लभ वन्यजीवों से भरे इस पार्क का नजारा पर्यटक करीब से देख सकेंगे।
बरसात में क्यों रहता है प्रतिबंध?
इस राष्ट्रीय उद्यान और टाइगर रिजर्व का बड़ा हिस्सा घने जंगलों, पहाड़ों और नदी-नालों से घिरा है। बरसात में यह क्षेत्र खतरनाक और जोखिम भरा हो जाता है। नाले और छोटी नदियाँ उफान पर रहती हैं, रास्ते कीचड़युक्त हो जाते हैं और वन्यजीव भी जंगल की गहराई में चले जाते हैं। ऐसे में पर्यटकों की सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण दोनों को ध्यान में रखते हुए वन विभाग जुलाई से सितंबर तक यहाँ सैलानियों के प्रवेश पर रोक लगाता है।
बरसात के बाद और भी निखर उठता है जंगल
चार महीने की बारिश के बाद जंगल अपनी असली खूबसूरती में नजर आते हैं। हरी-भरी घास, गीली मिट्टी की सुगंध, पहाड़ों से गिरते झरने और नीले आसमान के नीचे फैली हरियाली पर्यटकों का मन मोह लेती है। यही वजह है कि अक्टूबर से मार्च तक यह पार्क सैलानियों से गुलजार रहता है।
पर्यटन और रोजगार को बढ़ावा
पार्क खुलते ही स्थानीय स्तर पर पर्यटन गतिविधियाँ तेज हो जाती हैं। दूर-दराज से आने वाले पर्यटकों के कारण गाइड, होटल, ढाबा, वाहन चालक और हस्तशिल्प से जुड़े ग्रामीणों को रोजगार मिलता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह क्षेत्र राज्य सरकार की इको-टूरिज्म नीति के लिए भी अहम है, क्योंकि यहाँ का प्राकृतिक सौंदर्य और जैव-विविधता दुनिया के अन्य हिस्सों से पर्यटकों को आकर्षित करने की क्षमता रखती है।
दुर्लभ वन्यजीवों का बसेरा
गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान और तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व छत्तीसगढ़ के सबसे महत्वपूर्ण संरक्षित क्षेत्रों में गिना जाता है। यहाँ बाघ की मौजूदगी इस रिजर्व को खास बनाती है। इसके अलावा तेंदुआ, भालू, गौर, सांभर, चीतल, नीलगाय, जंगली कुत्ता, सियार जैसे वन्यजीव बड़ी संख्या में पाए जाते हैं। पक्षी प्रेमियों के लिए भी यह जगह खास है क्योंकि यहाँ सैकड़ों प्रजातियों के पक्षी देखे जा सकते हैं।
पर्यटकों के लिए नियम
वन विभाग ने साफ कहा है कि पार्क में आने वाले सैलानियों को निर्धारित नियमों का पालन करना होगा।
प्लास्टिक का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
वन्यजीवों को परेशान करने, शोर मचाने या पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने वालों पर कार्रवाई होगी।
पर्यटक केवल गाइड और विभाग द्वारा तय वाहनों से ही जंगल सफारी का आनंद ले सकेंगे।
वन विभाग की अपील
अधिकारियों ने कहा है कि उद्यान केवल घूमने-फिरने की जगह नहीं है बल्कि यह दुर्लभ वन्यजीवों का प्राकृतिक घर है। ऐसे में हर सैलानी का कर्तव्य है कि वह जंगल और यहाँ के जीवों की रक्षा में सहयोग करे।




