अवैध उगाही आरोपो के गढ़ में पहली बार महिला जनपद सीईओ की पदस्थापना, क्या? अब छूटेगी अवैध उगाही वाली दाग…

महिला अधिकारी के स्वभाव पहले जान लीजिए कैसी होती है महिला अधिकारी कुछ इस तरह से सोनहत विकास खण्ड वासियों को भी उम्मीद है
महिला अधिकारी अपने कार्यक्षेत्र में अनुशासन- संयम और करुणा का संगम होती हैं।
उनमें निर्णय लेने की अद्भुत क्षमता होती हैl पर हर निर्णय में मानवता और संवेदना झलकती है।
वे कठोर अनुशासन के साथ-साथ सहकर्मियों और जनसामान्य की समस्याओं को सुनने में धैर्यवान होती हैं।
उनका व्यवहार सौम्य, स्पष्ट और प्रेरणादायक होता है।
जहाँ नियम टूट रहे हों वहाँ वे कर्तव्यनिष्ठा से कठोर बनती हैं और जहाँ किसी को सहारे की ज़रूरत हो वहाँ माँ के जैसी ममता दिखाती हैं।
उनकी यही विशेषता उन्हें एक मजबूत और सफल अधिकारी बनाती है।
उनके नेतृत्व में कार्य भी पूर्ण होता है और लोगों का सम्मान भी सुरक्षित रहता है। ऐसी होती है महिला अधिकारी जिले का उदाहरण व्यख्यात है।
सोनहत जनपद पंचायत में पहली बार महिला जनपद सीईओ की पदस्थापना हुई है। इस आदेश और खबर ने जनप्रतिनिधियों और पंचायत बॉडी को राहत की सांस मिली है। तत्कालीन प्रभारी सीईओ पर कई गंभीर आरोप लगे थे जिसकी कई बार लिखित शिकायते भी हुई थी। आए दिन मीडिया में भी सोनहत जनपद कार्यालय सुर्खियों में रह पर जनपद महिला जनपद सीईओ की पदस्थापना ने माहौल बदल दिया है।
ताजा मामला
कोरिया :- सोनहत जनपद कार्यालय में अवैध वसूली के गंभीर आरोप सामने आए हैं, जहां 15वें वित्त आयोग की राशि के बिल भुगतान के लिए ऑपरेटर सीईओ के नाम पर सरपंच और सचिवों से घूस मांग रहे हैं। यह मामला पिछले एक हफ्ते से अधिक समय से चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि बिल भुगतान कार्यालय में लंबित हैं, जिससे स्थानीय विकास कार्यों में बाधा उत्पन्न हो रही है।
सूत्रों के अनुसार, जनपद कार्यालय में कार्यरत कुछ ऑपरेटरों ने एक अनौपचारिक व्यवस्था बना ली है, जिसके तहत वे सरपंचों और सचिवों से पैसे की मांग कर रहे हैं। यह राशि 15वें वित्त आयोग के तहत मिलने वाली वित्तीय सहायता के बिलों के भुगतान के लिए आवश्यक बताई जा रही है। इस प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी और भ्रष्टाचार के संकेत स्पष्ट हैं। बिलों के लंबित रहने से न केवल विकास कार्यों में देरी हो रही है, बल्कि स्थानीय प्रशासन की छवि भी धूमिल हो रही है। कई सरपंचों ने इस मुद्दे को लेकर शिकायत की है कि उन्हें बिना घूस दिए अपने अधिकारों का उपयोग करने में कठिनाई हो रही है। इससे ग्रामीण विकास योजनाओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है, जो कि सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल हैं।
इस मामले पर प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन स्थानीय नेताओं और नागरिकों ने इस मुद्दे की गंभीरता को समझते हुए कार्रवाई की मांग की है। यदि इस प्रकार की अवैध वसूली पर रोक नहीं लगाई गई, तो यह न केवल सरकारी योजनाओं को प्रभावित करेगा, बल्कि आम जनता का विश्वास भी डगमगा सकता है।सोनहत जनपद कार्यालय में अवैध वसूली के आरोप गंभीर हैं और इस पर तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता है। स्थानीय प्रशासन को चाहिए कि वह इस मामले की जांच करे और दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए। केवल तभी जाकर स्थानीय विकास कार्यों में तेजी लाई जा सकेगी और जनता का विश्वास पुनः स्थापित किया जा सकेगा।
तत्कालीन जनपद सीईओ पर आरोप
निर्माण कार्यो में 5 प्रतिशत कमीशन की मांग का आरोप,60 किलोमीटर दूर से कार्यालय आने जाने का आरोप मुख्याल से बाहर निवास,जनप्रतिनिधियों से सरल व्यवहार नही पर अब राहत की खबर है सीईओ बदले जा चुके है। अन्य कई आरोपो से घिरे हुए थे भाजपा शासन काल मे कुछ महीने पूर्व सोनहत मंडल के भाजपा पदाधिकारी ने भी 5 प्रतिशत कमीशन की मांग का आरोप तत्कालीन सीईओ पर लगाया था।
पुराने फाइल चर्चाओं में
महिला जनपद सीईओ के पदस्थापना को देखते हुए लोगो मे चर्चा तेज हो गई है कि अब पुराने फाइले खुलेंगी कार्यवाही की भी तलवार लटक सकती है। सोनहत विकास खण्ड अंतर्गत देखा जाए तो कई निर्माण कार्य लंबे समय से पेंडिंग है। कुछ के एडवांस राशि भी आहरण कर ली गई और वे कार्य अब तक शुरू नही हुए है। कई निर्माण कार्य अधर में अटके हुए है। महिला सीईओ की पदस्थापना से उम्मीद है कि अधर में लटके निर्माण कार्य को तेज गति मिलेगी ।




